मंदिर में परिक्रमा विषम संख्या में ही क्यों की जाती है? जानिए धार्मिक, वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व
भारतीय सनातन परंपरा में मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं है, बल्कि यह सकारात्मक ऊर्जा,
सनातन धर्म में समय को चार युगों में विभाजित किया गया है – सतयुग, त्रेतायुग,
भारत को मंदिरों और आध्यात्मिक परंपराओं का देश कहा जाता है। यहां प्रतिदिन करोड़ों लोग
भारतीय सनातन परंपरा में कर्म का सिद्धांत अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। हमारे शास्त्रों में
हिंदू धर्म में मृत्यु को जीवन का अंत नहीं बल्कि एक नई यात्रा की शुरुआत
भगवान शिव को हिंदू धर्म में संहार और पुनर्निर्माण के देवता के रूप में जाना
भारत को मंदिरों और आध्यात्मिक परंपराओं का देश कहा जाता है। यहां सदियों से पूजा-पाठ,
सनातन धर्म में चार युगों का वर्णन मिलता है—सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग। वर्तमान समय
भारतीय सनातन धर्म में चार युगों का वर्णन मिलता है – सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और
