सनातन धर्म में जीवन और मृत्यु को एक शाश्वत चक्र माना गया है। जन्म लेने
सनातन धर्म में समय को चार युगों में विभाजित किया गया है – सतयुग, त्रेतायुग,
भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं है, बल्कि यह
भारतीय संस्कृति, धर्म और लोककथाओं में श्राप (Curse) का उल्लेख सदियों से मिलता रहा है।
भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में पूजा-पाठ से जुड़ी अनेक परंपराएं हैं, जिनका पालन सदियों
भारत को मंदिरों और आध्यात्मिक परंपराओं का देश कहा जाता है। यहां सदियों से पूजा-पाठ,
भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं में भगवान के दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है।
सुबह उठते ही ये 5 संकेत दिखें तो समझिए खुलने वाली है किस्मत हर इंसान
